श्यामाश्याम सलोनी सूरत को श्रृंगार बसन्ती है - श्री घासीराम (ब्रज के लोकगीत)

श्यामाश्याम सलोनी सूरत को श्रृंगार बसन्ती है - श्री घासीराम (ब्रज के लोकगीत)

श्यामाश्याम सलोनी सूरत को श्रृंगार बसन्ती है। [1]
मोर मुकुट की लटक बसन्ती, चन्द्रकला की चटक बसन्ती,
मुख पर मुरली मटक बसन्ती।
सिर पै पेच श्रवन कुण्डल छबिदार बसन्ती है॥ श्या० [2]
माथे चन्दन लस्यौ बसन्ती, पट पीताम्बर कस्यो बसन्ती,
मेरे मन मोहन बस्यो बसन्ती।
गुञ्जमाल सोहै गल फूलन हार बसन्ती है॥ श्या० [3]
कनक कडूला हस्त बसन्ती, चलै चाल अलमस्त बसन्ती,
पहर रहे हैं वस्त्र बसन्ती।
रुनक झुनक पग नुपुर की झनकार बसन्ती है॥ श्या० [4]
सङ्ग ग्वालन को टोल बसन्ती, बाजै चंग ढप ढोल बसन्ती,
बोल रहे हैं बोल बसन्ती।
सब सखियन में राधेजू सिरताज बसन्ती है॥ श्या० [5]
परम प्रेम परशाद बसन्ती, लगै रसीला स्वाद बसन्ती,
बहै रही सब मरियाद बसन्ती।
घासीराम नाम श्री राधा सार बसन्ती हैं ॥ श्या० [6]
- श्री घासीराम (ब्रज के लोकगीत)

सुन्दर मुखवाले श्री श्यामाश्याम का श्रृंगार बसन्ती (हल्का पीला) वर्ण का है। [1]

श्री कृष्ण के मोर-मुकुट की लटकन भी बसन्ती है, 'चंद्रकला' (चन्द्र के आकर का मुकुट) भी बसन्ती वर्ण का है, एवं मुख पर सुशोभित मुरली भी बसंती वर्ण की है। श्री कृष्ण के सिर पर पगड़ी की लपेट एवं कानों में कुण्डल भी बसन्ती वर्ण का है। [2]

श्यामा श्याम के मस्तक पर लगा हुआ चन्दन बसन्ती वर्ण का है, पीताम्बर भी बसन्ती वर्ण का है, एवं मेरे मन में बसे हुए मनमोहन कृष्ण का वर्ण भी बसन्ती है। गले में शोभित गुंजामाला एवं फूलों का हार भी बसन्ती वर्ण का है। [3]

उनके हस्त कमलों में सुशोभित स्वर्ण के कंकण बसन्ती वर्ण के हैं, बसंत ऋतु में उनकी सुन्दर चाल मदमस्त है, उनके वस्त्र भी बसन्ती वर्ण के हैं । उनके चरण कमलों में शोभायमान नूपुर की रुनक-झुनक झंकार भी बसन्ती वर्ण की है। [4]

उनके संग ग्वाल-बालों की टोली का वर्ण भी बसन्ती है, ढप एवं ढोल के बजने से उत्पन्न ध्वनि भी बसन्ती वर्ण की है, सब लोग बसन्त ऋतु में आनंद में भरकर मधुर बोल बोल रहे हैं, और समस्त सखियों में श्री राधारानी सिरताज हैं, जिनका वर्ण भी बसन्ती है। [5]

श्री घासीराम जी कहते हैं, श्री श्यामाश्याम का परम प्रेम प्रसाद भी बसन्ती है, जिसका रसीला स्वाद भी बसन्ती वर्ण का है, होली लीला में टूट रही सब मर्यादा भी बसन्ती है, तथा समस्त सारों का सार, श्री राधा नाम भी बसन्ती है। [6]