वंशीवट तट निकट भूमि शोभित हरियारी।
निशिवासर इक संग सदा विहरहिं पिय-प्यारी॥
- श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (3)
यमुना तट के निकट वंशीवट की भूमि सदा वृक्षों और लताओं से आच्छादित हरिभरी रहती है जहां सर्वदा पिय प्यारी (राधा कृष्ण) नित्य विहार पारायण हैं।
निशिवासर इक संग सदा विहरहिं पिय-प्यारी॥
- श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (3)
यमुना तट के निकट वंशीवट की भूमि सदा वृक्षों और लताओं से आच्छादित हरिभरी रहती है जहां सर्वदा पिय प्यारी (राधा कृष्ण) नित्य विहार पारायण हैं।

