राधा-राधा जो कहे बसै हजारों कोस। तिनके पातक त्यों कटैं ज्यों सूरज से ओस॥ - ब्रज के दोहे जो "राधा-राधा" कहते हैं, वे चाहे हज़ारों कोस दूर ही क्यों न निवास करें, उनके पाप वैसे ही कट जाते हैं, जैसे सूर्य के प्रकट होते ही ओस समाप्त हो जाती है।