श्रीस्वामी हरिदास भज, छाँडि सकल जंजार।
या चक्कर में मति परै, यह झूठौ संसार॥
- श्री चतुर दास, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (10)
श्री चतुर दास जी अपने मन को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे मन, स्वामी हरिदास जी का भजन कर एवं श्री प्रिया प्रियतम के नित्य विहार का अखंड चिंतन कर । यह संसार तो सपने जैसा झूठा है, इसके चक्कर में मत पड़ क्योंकि यहाँ सुख शांति का लवलेश भी नहीं है ।
या चक्कर में मति परै, यह झूठौ संसार॥
- श्री चतुर दास, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (10)
श्री चतुर दास जी अपने मन को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे मन, स्वामी हरिदास जी का भजन कर एवं श्री प्रिया प्रियतम के नित्य विहार का अखंड चिंतन कर । यह संसार तो सपने जैसा झूठा है, इसके चक्कर में मत पड़ क्योंकि यहाँ सुख शांति का लवलेश भी नहीं है ।

