(राग सारंग रसिया)
रसिया को नारि बनावौ री।
कटि लहँगा उर माहिं कंचुकी, चुँदरी सीस उढ़ावौ री ॥ [1]
गाल गुलाल दृगन बिच काजर, बेंदी भाल लगावौ री ।
नारायण कर तारी बजाय के, निकट यशोमति नचावौ री ॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, होरी लीला (10)
(श्रीजी वचन सखी प्रति)
आज रसिया (श्री कृष्ण) को नारी बनाओ । उनके कटि में लहंगा, उर में कंचुकी एवं शीश पर चुनरी उड़ा दो । [1]
उनके कपोलों पर गुलाल, आँखों में काजल और भाल पर बिंदी लगाओ । पुन: इसे यशोदा जी के निकट लेजाकर ताली बजाकर इसको नचाओ । [2]
रसिया को नारि बनावौ री।
कटि लहँगा उर माहिं कंचुकी, चुँदरी सीस उढ़ावौ री ॥ [1]
गाल गुलाल दृगन बिच काजर, बेंदी भाल लगावौ री ।
नारायण कर तारी बजाय के, निकट यशोमति नचावौ री ॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, होरी लीला (10)
(श्रीजी वचन सखी प्रति)
आज रसिया (श्री कृष्ण) को नारी बनाओ । उनके कटि में लहंगा, उर में कंचुकी एवं शीश पर चुनरी उड़ा दो । [1]
उनके कपोलों पर गुलाल, आँखों में काजल और भाल पर बिंदी लगाओ । पुन: इसे यशोदा जी के निकट लेजाकर ताली बजाकर इसको नचाओ । [2]

