जातें पनपत बढत अरु, फूलत फलत महान।
सो सब प्रेमहिं प्रेम यह, कहत रसिक रसखान॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (44)
रसिक भक्त कहते हैं कि जिससे प्रेम उत्पन्न होता है, फूलता तथा बढ़ता है और परिपक्व रहता है, वह सब प्रेम ही होता है।
सो सब प्रेमहिं प्रेम यह, कहत रसिक रसखान॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (44)
रसिक भक्त कहते हैं कि जिससे प्रेम उत्पन्न होता है, फूलता तथा बढ़ता है और परिपक्व रहता है, वह सब प्रेम ही होता है।

