प्रेम छिपाये ना छिपे, जा घट परगट होय।
जद्यपि मुख बोलै नहीं, नैन देत हैं रोय॥
- ब्रज के दोहे
जिसके हृदय में प्रेम प्रकट हो जाता है, वह चाहे जितना भी प्रयास करे उसे छुपाने का, लेकिन प्रेम छुपता नहीं। मुख से भले ही वह कुछ न बोले, परंतु उसकी आँखों से बहते अश्रु स्वतः ही उसके प्रेम को व्यक्त कर देते हैं।
जद्यपि मुख बोलै नहीं, नैन देत हैं रोय॥
- ब्रज के दोहे
जिसके हृदय में प्रेम प्रकट हो जाता है, वह चाहे जितना भी प्रयास करे उसे छुपाने का, लेकिन प्रेम छुपता नहीं। मुख से भले ही वह कुछ न बोले, परंतु उसकी आँखों से बहते अश्रु स्वतः ही उसके प्रेम को व्यक्त कर देते हैं।

