ब्रज में हरि होरी मचाई।
इतते आई सुघर राधिका,
उततें कुँअर कन्हाई। [1]
हिलि-मिलि फाग परस्पर खेलैं,
सोभा बरनी न जाई। [2]
बाजत ढोल मृदंग झाँझ ढप,
बीना अरु शहनाई। [3]
उड़त अबीर गुलाल कुमकुमा,
रह्यौ सकल ब्रज छाई। [4]
राधे-श्याम जुगल जोरी पर,
सूरदास बलि जाई। [5]
- श्री सूरदास, सूर सागर
आज श्री कृष्ण ने ब्रज में होली मचाई है। एक ओर से सुंदरता की खान श्री राधिका आईं और दूसरी ओर से कुंवर कन्हैया श्री कृष्ण आये । [1]
दोनों मिल जुलकर एक दूसरे के संग होली खेल रहे हैं, जिसकी शोभा का वर्णन करते नहीं बनता। [2]
होली के इस उत्सव में ढोल, मृदंग, झाँझ, ढप, वीणा और शहनाई बज रही है। [3]
चारों दिशाओं से अबीर, गुलाल एवं कुमकुम उड़ रहा है, जो सम्पूर्ण ब्रज मंडल में छाया हुआ है। [4]
श्री सूरदास जी कहते हैं कि श्री राधे श्याम की सुन्दर युगल जोड़ी पर मैं स्वयं को न्यौछावर करता हूँ। [5]
इतते आई सुघर राधिका,
उततें कुँअर कन्हाई। [1]
हिलि-मिलि फाग परस्पर खेलैं,
सोभा बरनी न जाई। [2]
बाजत ढोल मृदंग झाँझ ढप,
बीना अरु शहनाई। [3]
उड़त अबीर गुलाल कुमकुमा,
रह्यौ सकल ब्रज छाई। [4]
राधे-श्याम जुगल जोरी पर,
सूरदास बलि जाई। [5]
- श्री सूरदास, सूर सागर
आज श्री कृष्ण ने ब्रज में होली मचाई है। एक ओर से सुंदरता की खान श्री राधिका आईं और दूसरी ओर से कुंवर कन्हैया श्री कृष्ण आये । [1]
दोनों मिल जुलकर एक दूसरे के संग होली खेल रहे हैं, जिसकी शोभा का वर्णन करते नहीं बनता। [2]
होली के इस उत्सव में ढोल, मृदंग, झाँझ, ढप, वीणा और शहनाई बज रही है। [3]
चारों दिशाओं से अबीर, गुलाल एवं कुमकुम उड़ रहा है, जो सम्पूर्ण ब्रज मंडल में छाया हुआ है। [4]
श्री सूरदास जी कहते हैं कि श्री राधे श्याम की सुन्दर युगल जोड़ी पर मैं स्वयं को न्यौछावर करता हूँ। [5]

