संत संग सत्संग करु, तिन सेवहु दिन रात।
श्रद्धा, रति, अरु भक्ति सब, आपुहिँ तेहि मिलि जात॥
- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (50)
किसी वास्तविक रसिक की शरण ग्रहण कर, उनका सतत सत्संग करते रहने से श्रद्धा, रति एवं भक्ति क्रमशः स्वयं प्राप्त हो जाती है।
श्रद्धा, रति, अरु भक्ति सब, आपुहिँ तेहि मिलि जात॥
- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (50)
किसी वास्तविक रसिक की शरण ग्रहण कर, उनका सतत सत्संग करते रहने से श्रद्धा, रति एवं भक्ति क्रमशः स्वयं प्राप्त हो जाती है।

