प्यारी के अति प्यार सों, पिय परसत कर पाय - श्री ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (51)

प्यारी के अति प्यार सों, पिय परसत कर पाय - श्री ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (51)

प्यारी के अति प्यार सों, पिय परसत कर पाय ।
पीर प्रेम पहचानि कै, छिमा करी मुसुकाय ॥

- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (51)

जब श्री राधा मान करती हैं तब श्री कृष्ण अति ही प्रेम में भरकर, उनके चरणों को अपने कर कमलों द्वारा स्पर्श कर, उन श्री चरणों की आराधना करते हैं । श्री कृष्ण के प्रेम की पीर को पहचान कर श्री राधा उन्हें क्षमा कर मुस्कुरा देती हैं ।