लाल गोपाल गुलाल हमारी - श्री कृष्णदास जी

लाल गोपाल गुलाल हमारी - श्री कृष्णदास जी

(राग बसंत)
लाल गोपाल गुलाल हमारी, आँखिन में जिन डारौ जू ।
बदन चन्द्रमा नैन चकोरी, इन अन्तर जिन पारौ जू ॥ [1]
गावो राग बसन्त परस्पर, अटपटे खेल निवारौ जू ।
कुमकुम रंग सों भरी पिचकारी, तकि नैनन जिन मारौ जू ॥ [2]
बंक विलोचन दुखमोचन लोचन, भरि दृष्टि निहारौ जू ।
नागरी नायक सब सुखदायक, कृष्णदास कों तारौ जू ॥ [3]
- श्री कृष्णदास जी

हे गोपाल लाल, मेरी आँखों में गुलाल न डालो, क्योंकि ये सदैव तुम्हारे वदन-चंद्र को चकोर पक्षी की भांति निहारती रहती हैं। [1]

हे कृष्ण, राग बसंत में कुछ गाओ परंतु अपने नटखटपने का त्याग करो, कुमकुम से भरी पिचकारी से मेरे नेत्रों को निशाना न साधो । [2]

हे कमल नयन वाले श्री कृष्ण, अपनी तिरछी चितवन से मेरी ओर निहारो जिससे मेरे समस्त दुखों का नाश हो । हे नागरी नायक, समस्त सुखों को प्रदान करने वाले श्री कृष्ण, मुझे कृष्णदास को इस विरह सागर से उबार लो। [3]