लोक वेद कुल-धर्म बल, सब प्रकार अति हीन।
पै पद-बल ब्रजराज के, परम ढिठाई कीन॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (3)
मैं लोक, वेद, कुल-धर्म के बल से विहीन हूँ एवं सब प्रकार से अति हीन हूँ । परंतु ब्रजराज श्री कृष्ण चन्द्र के चरणों के बल से मैंने परम ढिठाई (ढीठता) की है ।
पै पद-बल ब्रजराज के, परम ढिठाई कीन॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (3)
मैं लोक, वेद, कुल-धर्म के बल से विहीन हूँ एवं सब प्रकार से अति हीन हूँ । परंतु ब्रजराज श्री कृष्ण चन्द्र के चरणों के बल से मैंने परम ढिठाई (ढीठता) की है ।

