कौन दिन होगा नाथ - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (77)

कौन दिन होगा नाथ - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (77)

(कवित्त)
कौन दिन होगा नाथ ! जो बसेंगे वृन्दावन,
नित्य उठ प्रात ही यमुना में नहायेंगे। [1]
हरेकृष्ण ! हरेकृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे !
मुख से सदैव पुलकायमान गायेंगे॥ [2]
सेवाकुञ्ज वंशीवट कालीदह कुञ्जन में,
प्रेम में बिभोर मन चाहे जहाँ जायेंगे। [3]
तेरे ही ध्यान में प्यारे तजेंगे अपने प्राण,
तेरे ही कहा के श्याम तुझ में समायेंगे॥ [4]

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (77)

हे नाथ, ऐसा कौन सा दिन होगा जब मैं वृन्दावन में बसूँगा ? जहाँ नित्य प्रातःकाल उठकर श्री यमुना जी में स्नान करूँगा। [1]

मैं नित्य हरेकृष्ण ! हरेकृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ! महामंत्र का ह्रदय से पुलकित होकर उच्चारण करूँगा। [2]

वृन्दावन में जहाँ चाहूँ वहां भ्रमण करूँगा, कभी सेवाकुंज, तो कभी वंशीवट, कभी कालीदह, तो कभी विभिन्न कुंजों का दर्शन करूँगा। [3]

डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती जी कहते हैं कि हे प्यारे श्री कृष्ण, आपका ही ध्यान करता हुआ मैं अपने प्राण त्यागूंगा, आपका ही कहाऊँगा और आपको ही प्राप्त करूँगा। [4]