बरसत रंग-महल मैं रंग - ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (70)

बरसत रंग-महल मैं रंग - ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (70)

(राग सोरठ)
बरसत रंग-महल मैं रंग।
चौपन चढ़ि बढ़ि लेत तान दोऊ, नाचत सरस सुगंध॥ [1]
ललिता ललित मृदंग बजावति, अलि बिसाख मुहचंग।
"ब्रजनिधि” रसिक मनोहर जोरी, विलसत केलि अभंग॥ [2]

- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (70)

रंग महल में रंग बरस रहा है। दोनों श्री श्यामाश्याम उत्सुकता से बढ़-चढ़कर तान ले रहे हैं और सरस नृत्य कर रहे हैं। [1]

श्री ललिता जू ललित मृदंग बजा रही हैं एवं विशाखा मुहचंग बजा रही हैं । श्री ब्रजनिधि जी कहते हैं कि रसिकों के मन को हरण करने वाली युगल जोड़ी श्री श्यामाश्याम अखन्ड रूप से केलि विलस रहे हैं। [2]