प्रान पिया प्रीतम प्यारे को - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष

प्रान पिया प्रीतम प्यारे को - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष

(राग धनाश्री)
प्रान पिया प्रीतम प्यारे को,
आज रंग में बोरूं।
अंक भरूं न डरूं कलंक मैं,
लोक लाज तृण तोरूं॥ [1]
वा बिन परत न चैन एक छिन,
जातें तोहि निहोरूं।
ललित लड़ैती बेग मिला उन,
पायँ लाग कर जोरूं॥ [2]

- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष

एक सखी कहती है कि आज मैं अपने प्राण प्रियतम श्री कृष्ण को रंग में डुबो दूंगी। प्यारे को अपने हृदय से लगा लूंगी, किसी कलंक से नहीं डरूंगी, सब लोक-लाज तृण के समान त्याग दूंगी। [1]

हे सखी, श्री कृष्ण के बिना मुझे एक क्षण भी चैन नहीं पड़ता, इसलिए मैं तुझसे विनती करती हूँ, कृपया शीघ्र उन श्यामसुंदर से मुझे मिला दे, मैं तेरे पाँव पड़ती हूँ। [2]