तीन लोक, चौदह भुवन, भोजन पुजवत जोय।
द्वारें देख्यौ नंद के, माँगत माखन रोय॥
- ब्रज के दोहे
तीनों लोकों एवं चौदह भुवनों में जो सबके भोजन की व्यवस्था करते हैं वही परम भगवान श्री कृष्ण, प्रेम के वशीभूत होकर, ब्रज में नंदजी के द्वारे माखन खाने के लिए रो रहे हैं।
द्वारें देख्यौ नंद के, माँगत माखन रोय॥
- ब्रज के दोहे
तीनों लोकों एवं चौदह भुवनों में जो सबके भोजन की व्यवस्था करते हैं वही परम भगवान श्री कृष्ण, प्रेम के वशीभूत होकर, ब्रज में नंदजी के द्वारे माखन खाने के लिए रो रहे हैं।

