वृंदावन खेल रच्यो भारी - श्री पुरुषोत्तम जी

वृंदावन खेल रच्यो भारी - श्री पुरुषोत्तम जी

वृंदावन खेल रच्यो भारी ।
वृंदावन की गोरी नारी टूटी हार फटे सारी ॥ [1]
ब्रज की होरी ब्रज की गारी ब्रज की श्री राधा प्यारी ॥
‘पुरुषोत्तम’ प्रभु होरी खेले तन मन धन सरबस वारी ॥ [2]

- श्री पुरुषोत्तम जी

वृंदावन में होली का ऐसा अद्भुत खेल रचाता है कि यहाँ की गोरी नारियों के हार टूट जाते हैं एवं साड़ियाँ फट जाती हैं । [1]

ब्रज की होली, ब्रज की गाली एवं ब्रज की श्री राधा प्यारी, विश्व से न्यारी है । श्री पुरुषोत्तम जी कहते हैं कि उनके प्रभु श्री श्यामसुन्दर आज होली खेल रहे हैं जिस पर वे अपना तन, मन, धन अर्थात् सर्वस्व न्यौछवार करते हैं । [2]