विहराम्य् अनया नित्यं अस्याः प्रेम-वशी-कृतः।
इमं तु मत्-प्रियां विद्धि राधिकां पर-देवताम्॥
- सनत्कुमार संहिता (36.160)
श्री कृष्ण श्री शिवजी से कहते हैं – श्री राधा के प्रेम से वशीभूत होकर मैं सदा नित्य ही उनके संग विहार करता हूँ । श्री राधिका को ही मेरी प्रिया जानना और वे ही पर देवता हैं ।
इमं तु मत्-प्रियां विद्धि राधिकां पर-देवताम्॥
- सनत्कुमार संहिता (36.160)
श्री कृष्ण श्री शिवजी से कहते हैं – श्री राधा के प्रेम से वशीभूत होकर मैं सदा नित्य ही उनके संग विहार करता हूँ । श्री राधिका को ही मेरी प्रिया जानना और वे ही पर देवता हैं ।

