अली मधुरी की सुनौ, करुणा श्यामा जोय ।
चरण कमल देखै बिना, कल न परै छिन मोय ॥
- श्री अली मधुरी जी, श्री निकुंज केली मधुरी, श्री राधा करुणावली (1)
हे परम करुणामयी स्वामिनी श्री राधा, मेरी विनती को कृपा सुनो! तुम्हारे चरण कमलों को देखे बिना मुझे पल भर को भी चैन नहीं है ।
चरण कमल देखै बिना, कल न परै छिन मोय ॥
- श्री अली मधुरी जी, श्री निकुंज केली मधुरी, श्री राधा करुणावली (1)
हे परम करुणामयी स्वामिनी श्री राधा, मेरी विनती को कृपा सुनो! तुम्हारे चरण कमलों को देखे बिना मुझे पल भर को भी चैन नहीं है ।

