पकरे हैं प्यारी पिया आली आज फाग में - श्री सरस माधुरी

पकरे हैं प्यारी पिया आली आज फाग में - श्री सरस माधुरी

(कवित्त)
पकरे हैं प्यारी पिया आली आज फाग में।
मचि रही होरी गोरी बृंदाबन बाग में॥ [1]
घेर लिये लाल मुख मसली गुलाल बाल।
गुलचे हैं गाल बस कीने अनुराग में॥ [2]
नांच लै नचाये अंग अंग छिरकाये साज।
बाजहू बजाये रंग छायो अति राग में॥ [3]
सरसबिहारी लिये निज उरधारी नारी।
यह सुख भारी लिख्यो सखियन के भाग में॥ [4]

- श्री सरस माधुरी

हे सखी, आज वृन्दावन की कुंजों में होली के अवसर पर श्री राधा की सखियों ने श्री श्यामसुंदर को पकड़ लिया। [1]

श्री राधा ने श्री कृष्ण को घेर लिया और उनके मुख पर गुलाल मलकर, उनके गाल पर प्रेम भरी चपत देकर, उन्हें अपने अनुराग रंग से वशीभूत कर लिया है। [2]

फिर उन्होंने श्री कृष्ण को अपनी धुन पर नाच नचाया, बाजे बजाकर उनके अंग-अंग को ताल पर थिरकाकर, संपूर्ण वातावरण को रंगीन बना दिया। [3]

श्री सरसमाधुरी जी कहते हैं कि श्री राधा का ऐसा रूप देखकर श्री कृष्ण ने उन्हें अपने हृदय में बसा लिया। यह सुख अत्यंत दुर्लभ है, जो मात्र सखियों के ही भाग्य में लिखा है। [4]