नांम न कछू बिहार बिनु - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (133)

नांम न कछू बिहार बिनु - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (133)

नांम न कछू बिहार बिनु, ठाली नांम निवार।
नामी नांम सुहावनौं, जब देखौं करत बिहार॥

- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (133)

नित्य विहार रसमय उपासना में भाव से विहीन ख़ाली (केवल) नाम लेना तुम छोड़ दो क्योंकि भाव के बिना केवल नाम लेना ऐसे है जैसे बिना दूध की बांझ गैया । श्री युगल सरकार को नाम तभी सुहावना लगता है जब साधक नित्य विहार का अनुसंधान करके भाव से नाम लेता है ।