नागारिया नवनागरी, खेलत रास विलास।
पल पल वारों हे सखी, नित नव नागरिदास॥
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी
हे सखी, नित्य नवीन नागर एवं नागरी (श्री राधा कृष्ण) रास विलास खेल रहे हैं जिनकी छवि को निहार कर पल पल नागरीदास स्वयं को न्यौछवार कर रहे हैं ।

