कव कालिंदी कूल की, ह्वैहों तरवर डारि।
ललितकिशोरी लाड़िले, झूले झूला डारि॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (59)
कब मैं यमुना के किनारे के वृक्षों की डाल बनूँगा, जिस पर बैठकर लाड़लीलाल (श्री राधा कृष्ण) झूला झूलेंगे।
ललितकिशोरी लाड़िले, झूले झूला डारि॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (59)
कब मैं यमुना के किनारे के वृक्षों की डाल बनूँगा, जिस पर बैठकर लाड़लीलाल (श्री राधा कृष्ण) झूला झूलेंगे।

