जीवन सफल कमल पग पेखे - श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (53)

जीवन सफल कमल पग पेखे - श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (53)

जीवन सफल कमल पग पेखे।
कौंन काज श्रुति मारग संजम, साधन बहुत परेखे॥ [1]
संपति भोग मुक्ति स्वर्गादिक, करि विचार सब देखे।
'भोरी' बिनु पद कंज छटा के, सपनेहु सुखद न लेखे॥ [2]

- श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (53)

हे श्रीराधे! आपके चरण-कमलों के दर्शन प्राप्त करने पर, मैं अपने जीवन को परम सफल अनुभव करूँगी। उस समय मुझे, श्रुतियों द्वार प्रतिपादित मार्ग पर चलना, संयम-नियम आदि अध्यवसाय करना तथा अनेकानेक साधनों को अपनाना - ये सभी निरर्थक प्रतीत होने लगेंगे। [1]

तब मुझे, सुख-सम्पत्तियों का उपभोग, मुक्ति और भुक्ति की वार्ता तथा स्वर्गादिक उच्च लोकों की चर्चा-इन सभी पर विचार करना भी व्यर्थ लगने लगेगा। श्रीहित भोरी सखी जी कहती हैं कि आपके चरण-कमलों के दर्शनों के बिना, सपने में भी सुख की प्राप्ति पूरी तरह से असम्भव ही है। [2]