भगवत रसिक अनन्य, होय अद्भुत रस चाटै।
स्यामाँ स्याम बिहार, नित्य तिहिं काल न काटै॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (26)
श्री भगवत रसिक जी कहते हैं कि रसिक भक्त अपने इष्टदेव के प्रति अनन्य होता है, इसी कारण वह अद्भुत रस का आस्वादन करता है। श्यामाश्याम के नित्यबिहार रस में खोए हुए उस रसिक को काल भी नहीं काट सकता।
स्यामाँ स्याम बिहार, नित्य तिहिं काल न काटै॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (26)
श्री भगवत रसिक जी कहते हैं कि रसिक भक्त अपने इष्टदेव के प्रति अनन्य होता है, इसी कारण वह अद्भुत रस का आस्वादन करता है। श्यामाश्याम के नित्यबिहार रस में खोए हुए उस रसिक को काल भी नहीं काट सकता।

