कुँज कुँज निरखत फिरौ, जमुना जल में न्हाँऊ।
श्री वृन्दावन छांड़ि कै, अनत न कित हूँ जाऊँ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (3)
मैं श्री वृन्दावन में विचरण करते हुए विभिन्न कुंजों को निहारा करूँगा एवं यमुना जल में स्नान करूँगा। श्री वृन्दावन को छोड़कर मैं कभी भी कहीं और नहीं जाऊंगा।
श्री वृन्दावन छांड़ि कै, अनत न कित हूँ जाऊँ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (3)
मैं श्री वृन्दावन में विचरण करते हुए विभिन्न कुंजों को निहारा करूँगा एवं यमुना जल में स्नान करूँगा। श्री वृन्दावन को छोड़कर मैं कभी भी कहीं और नहीं जाऊंगा।

