राध्नोति सकलान्कामास्तस्माद्राधेति कीर्तिता।
आत्रोक्तानां यत्नां च ऋषिरस्म्यहमेव च॥
- देवी भागवत (9.50.18)
भगवान नारायण श्री नारद मुनि से कहते हैं - वे सभी कामनाओं को पूर्ण करती हैं इसीलिए उन्हें राधा कहते हैं । यहाँ उल्लिखित आख्यानों के संबंध में मैं ही ऋषि हूँ।
आत्रोक्तानां यत्नां च ऋषिरस्म्यहमेव च॥
- देवी भागवत (9.50.18)
भगवान नारायण श्री नारद मुनि से कहते हैं - वे सभी कामनाओं को पूर्ण करती हैं इसीलिए उन्हें राधा कहते हैं । यहाँ उल्लिखित आख्यानों के संबंध में मैं ही ऋषि हूँ।

