रसिक बिहारी सौं बनी, पल नहीं छोड़ै पास।
ना जानौं कब जात है, वन में खेलन रास॥
- श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (16)
मेरी रसिक बिहारी से ऐसी बनी हुई है कि वे पल भर को भी मेरा साथ नहीं छोड़ते, जिसे देखकर मुझे आश्चर्य होता है कि ये वन में रास रचाने कब जाते होंगे।
ना जानौं कब जात है, वन में खेलन रास॥
- श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (16)
मेरी रसिक बिहारी से ऐसी बनी हुई है कि वे पल भर को भी मेरा साथ नहीं छोड़ते, जिसे देखकर मुझे आश्चर्य होता है कि ये वन में रास रचाने कब जाते होंगे।

