जय राधा जय राधा राधा जय श्रीराधा।
गौर अंगमें झलमलात छवि, नख सिख सुंदर रूप अगाधा।
सुन्दर श्याम मनोहर प्यारे, निरखत नयनन सुखसाधा॥ [1]
मनमौहन की मोहनी राधे, विछुरत नहीं पल छिन आधा।
अलि माधुरी श्यामा जू की, चरन शरन रहे नहिं बाधा॥ [2]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका
श्री राधा की जय हो, जय हो, जय हो, जिनके गौर अंग की छवि बड़ी सुन्दर है, एवं जो चरण नख से शिखा पर्यन्त सुन्दर रूप माधुरी की अगाध सागर हैं, जिसको देखकर सबके मन को मोहनेवाले श्री श्यामसुंदर के नयनों को बहुत सुख मिलता है। [1]
मनमोहन श्री कृष्ण को मोहनेवाली श्री राधा उनसे एक क्षण के लिए भी नहीं बिछुड़ती हैं। श्री अलि माधुरी जी कहते हैं कि श्री श्यामा जू के चरण कमलों की शरण लेने से समस्त बाधाएं मिट जाती हैं। [2]
गौर अंगमें झलमलात छवि, नख सिख सुंदर रूप अगाधा।
सुन्दर श्याम मनोहर प्यारे, निरखत नयनन सुखसाधा॥ [1]
मनमौहन की मोहनी राधे, विछुरत नहीं पल छिन आधा।
अलि माधुरी श्यामा जू की, चरन शरन रहे नहिं बाधा॥ [2]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका
श्री राधा की जय हो, जय हो, जय हो, जिनके गौर अंग की छवि बड़ी सुन्दर है, एवं जो चरण नख से शिखा पर्यन्त सुन्दर रूप माधुरी की अगाध सागर हैं, जिसको देखकर सबके मन को मोहनेवाले श्री श्यामसुंदर के नयनों को बहुत सुख मिलता है। [1]
मनमोहन श्री कृष्ण को मोहनेवाली श्री राधा उनसे एक क्षण के लिए भी नहीं बिछुड़ती हैं। श्री अलि माधुरी जी कहते हैं कि श्री श्यामा जू के चरण कमलों की शरण लेने से समस्त बाधाएं मिट जाती हैं। [2]

