नीलंबर को ध्यान धरि - श्री ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (61)

नीलंबर को ध्यान धरि - श्री ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (61)

नीलंबर को ध्यान धरि, भए स्याम अभिराम।
पीतबसन धारे रहैं, प्रिया बरन लखि स्याम॥
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (61)

नीले वस्त्रों को धारण करने वाली श्री राधा का ध्यान कर श्री श्यामसुन्दर उन्मत्त हो उठे । श्री किशोरीजी के गौर वर्ण वाले रूप को निहारने के कारण ही वे सदा पीतांबर धारण करते हैं ।