रसिकन को सतसंग कर - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (30)

रसिकन को सतसंग कर - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (30)

रसिकन को सतसंग कर, सीख भावना ध्यान।
ललित लड़ैती युगल भज, जासों होय कल्यान॥

- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (30)

हमें वृंदावन के रसिकों का सत्संग करके उनसे यह सीखना चाहिए कि श्री राधा कृष्ण का ध्यान कैसे करें और कैसी भावनाएँ विकसित करें। श्री ललित लड़ैती जी के अनुसार, युगल सरकार के भजन से ही जीव का कल्याण संभव है, इसके अतिरिक्त कोई अन्य उपाय नहीं है।