ब्रज की ठकुराईन है श्यामा - श्री द्वारकेश जी

ब्रज की ठकुराईन है श्यामा - श्री द्वारकेश जी

(राग बिहाग)
ब्रज की ठकुराईन है श्यामा।
जिन पद कमल धूर की सेवा, याचत कमला रामा॥ [1]
तिन हित बँधे स्याम रस दामन, जे जग पूरन कामा।
धरें न धीर रंच इन के बिनु, जदपि कोटि ब्रजबामा॥ [2]
सकल रसिक भक्तन हित, युगल बिहार कियो ब्रजधामा।
'द्वारकेश' रस राज कुंवरि की, मनवांछित अभिरामा॥ [3]

- श्री द्वारकेश जी

ब्रज की ठकुराइन, अर्थात ब्रज की अधिष्ठात्री, श्री श्यामा हैं, जिनके चरण-कमलों की रज की सेवा के लिए लक्ष्मी जी भी याचना करती हैं। [1]

उन्हीं श्री राधारानी के रस-दामन के प्रेम बंधन से स्वयं पूर्णकाम श्री कृष्ण बंधे हैं। यद्यपि असंख्य ब्रज गोपियाँ हैं, परंतु श्री राधारानी के बिना श्री कृष्ण रंच मात्र भी धैर्य नहीं रख पाते। [2]

समस्त रसिक भक्तों के हृदय की अभिलाषा को पूर्ण करने के लिए श्री राधा ने श्री कृष्ण संग ब्रज में युगल विहार किया है। श्री द्वारकेश जी कहते हैं कि रसराज भगवान श्री कृष्ण की भी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली केवल कुंवरि श्री राधा ही हैं। [3]