बांकेबिहारी रूप कौ, दृग द्वारन ह्वै लाय।
हरैं हरैं हिय सौं जपै, नीके सुमन बिछाय॥
- ब्रज के दोहे
बाँके बिहारी जी महाराज की मनोरम छवि को नयनों के मार्ग से भीतर लेजाकर, सुमनों से सुसज्जित ह्रदय सेज पर उन्हें विराजमान करके, धीरे धीरे मन लगाकर उनके रसमय नाम एवं रसाप्लुत लीलाओं का प्रेमपूर्वक स्मरण करना चाहिए ।
हरैं हरैं हिय सौं जपै, नीके सुमन बिछाय॥
- ब्रज के दोहे
बाँके बिहारी जी महाराज की मनोरम छवि को नयनों के मार्ग से भीतर लेजाकर, सुमनों से सुसज्जित ह्रदय सेज पर उन्हें विराजमान करके, धीरे धीरे मन लगाकर उनके रसमय नाम एवं रसाप्लुत लीलाओं का प्रेमपूर्वक स्मरण करना चाहिए ।

