नन्दलाल दशरथ सुवन, उभय एक सरकार।
नारायण जो दो कहैं, ते नर विना बिचार॥ (151)
नारायण सब एक हैं, रंग रूप तिल रेख।
उनके दृग गम्भीर हैं, इनके चपल विशेष॥ (152)
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (151, 152)
नंदलाल श्री कृष्ण एवं दशरथ सुवन श्री राम दोनों एक ही हैं । जो इनको दो कहते हैं वे जीव अज्ञानी हैं । दोनों का एक सा रंग, रूप, तिल एवं चिन्ह आदि हैं अंतर बस यह है कि श्री राम के नेत्र थोड़े गंभीर हैं और श्री कृष्ण के विशेष रूप से चंचल हैं ।
नारायण जो दो कहैं, ते नर विना बिचार॥ (151)
नारायण सब एक हैं, रंग रूप तिल रेख।
उनके दृग गम्भीर हैं, इनके चपल विशेष॥ (152)
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (151, 152)
नंदलाल श्री कृष्ण एवं दशरथ सुवन श्री राम दोनों एक ही हैं । जो इनको दो कहते हैं वे जीव अज्ञानी हैं । दोनों का एक सा रंग, रूप, तिल एवं चिन्ह आदि हैं अंतर बस यह है कि श्री राम के नेत्र थोड़े गंभीर हैं और श्री कृष्ण के विशेष रूप से चंचल हैं ।

