नव निकुञ्ज वर नागरी, अहो प्रिये रस दान।
सोइ टहल मुहि कृपा कर, देहु आपुनी जान॥
- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (85.3)
हे नित्य निकुंजेश्वरी श्री राधे! हे रस प्रदायिनी प्रिया जू! मुझे अपनी दासी जान अपनी महल की टहल (निज सेवा) दीजिए ।
सोइ टहल मुहि कृपा कर, देहु आपुनी जान॥
- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (85.3)
हे नित्य निकुंजेश्वरी श्री राधे! हे रस प्रदायिनी प्रिया जू! मुझे अपनी दासी जान अपनी महल की टहल (निज सेवा) दीजिए ।

