मेंहदी रची कुंवरि के पाइन - श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली

मेंहदी रची कुंवरि के पाइन - श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली

मेंहदी रची कुंवरि के पाइन।
कोमल नख सु रहे अति सुन्दर,
झलकत विविध बनाइन॥ [1]
रूचिर अंगुरियन सोहत विछुवा,
मंजुल जटित जराइन।
ले ले रसिक लाल हाथन पै,
अवलोकत चित चाइन॥ [2]
नैनन छुबाई छुबाई उर लावत,
सुख पावत बहु भाइन।
'आनन्दघन' पिय चतुर शिरोमनि,
कौतिक केलि पराइन॥ [3]

- श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली

श्री राधा के चरण कमलों में मेहँदी रची है। उनके नख कोमल एवं सुन्दर हैं जो उनके श्री चरणों की शोभा को विविध प्रकार से बढ़ा रही है । [1]

श्री राधा के चरण कमलों की सुन्दर उँगलियों में बिछुआ धारण है जिनमें अनेक रत्न जटित हैं। इन चरण कमलों को अपने हाथों में बार-बार लेकर लाल श्री कृष्ण निहारते हैं एवं उनका चित्त उसी में अनुरक्त होता रहता है। [2]

श्री कृष्ण इन चरण कमलों को बार-बार अपने नेत्रों से स्पर्श कराते हैं एवं ह्रदय से लगाते हैं। श्री आनन्दघन जी कहते हैं कि चतुर शिरोमणि श्री कृष्ण इन्हीं चरण कमलों की कृपा बल से नित्य ही केलि परायण हैं। [3]