हमारे माई श्यामाजू सरदार - श्री सरस माधुरी

हमारे माई श्यामाजू सरदार - श्री सरस माधुरी

(राग मलार)
हमारे माई श्यामाजू सरदार।
जिनके गुन गावत बंशी मैं, नित प्रति नन्दकुमार॥ [1]
पावत रीझि प्रियासों प्रीतम, नवल निकुंज बिहार। 
सरस माधुरी रसबस ह्वै पिय, देत अपनपो वार॥ [2]
- श्री सरस माधुरी

हमारी स्वामिनी श्री श्यामा जू ही सबकी सरदार हैं, जिनके गुणों का गान नंदनंदन श्री कृष्ण नित्य प्रति अपनी वंशी से करते हैं। [1]

श्री श्यामसुन्दर निकुंज विहार रस का आस्वादन श्री प्यारी जू की कृपा से ही प्राप्त करते हैं। श्री सरस माधुरी जी कहते हैं कि श्री कृष्ण रस के वशीभूत होकर स्वयं को श्री राधारानी के चरणों में न्योछावर करते हैं। [2]