(कवित्त)
श्यामा श्याम बैठे नव, फूलन की सेज पर,
अरस परस दोऊ, करत सिंगार हैं। [1]
फूलन सों बैनी गुही, शीश फूल फूलनि के,
फूल रहे फूल तन, फूलन के हार हैं॥ [2]
फूलन के रसन, दसन तन फूलन के,
नख सिख फूले मानों, फूलन के डार हैं। [3]
फूलन को भार न, सम्हारो जात काहू भांति,
प्यारी पिय फूल हूते, अति सुकुवार हैं॥ [4]
- श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (290)
श्री श्यामाश्याम नवीन फूलों की सेज पर विराजमान हैं, और एक-दूसरे की रूप माधुरी का दर्शन कर रहे हैं तथा एक-दूसरे का फूलों से श्रृंगार कर रहे हैं। [1]
श्री राधा की वेणी फूलों से गुथी हुई है और उनके शीश पर फूलों से निर्मित शीशफूल है। दोनों प्रिया-प्रियतम के तन फूलों के समान कोमल हैं, जो खिल रहे हैं और गले में भी फूलों का ही हार है। [2]
दोनों की रसना एवं दन्त-पंक्ति भी फूलों की हैं, और दोनों के तन फूलों से सुसज्जित हैं। नख से शिख तक ऐसे प्रतीत होते हैं मानो दोनों नित्य दम्पति फूलों की डाल हैं। [3]
श्री माधुरी दास जी कहते हैं कि श्री श्यामाश्याम से फूलों का भार भी संभाला नहीं जा रहा है, क्योंकि दोनों प्रिया प्रियतम फूल से भी अति कोमल हैं। [4]
श्यामा श्याम बैठे नव, फूलन की सेज पर,
अरस परस दोऊ, करत सिंगार हैं। [1]
फूलन सों बैनी गुही, शीश फूल फूलनि के,
फूल रहे फूल तन, फूलन के हार हैं॥ [2]
फूलन के रसन, दसन तन फूलन के,
नख सिख फूले मानों, फूलन के डार हैं। [3]
फूलन को भार न, सम्हारो जात काहू भांति,
प्यारी पिय फूल हूते, अति सुकुवार हैं॥ [4]
- श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (290)
श्री श्यामाश्याम नवीन फूलों की सेज पर विराजमान हैं, और एक-दूसरे की रूप माधुरी का दर्शन कर रहे हैं तथा एक-दूसरे का फूलों से श्रृंगार कर रहे हैं। [1]
श्री राधा की वेणी फूलों से गुथी हुई है और उनके शीश पर फूलों से निर्मित शीशफूल है। दोनों प्रिया-प्रियतम के तन फूलों के समान कोमल हैं, जो खिल रहे हैं और गले में भी फूलों का ही हार है। [2]
दोनों की रसना एवं दन्त-पंक्ति भी फूलों की हैं, और दोनों के तन फूलों से सुसज्जित हैं। नख से शिख तक ऐसे प्रतीत होते हैं मानो दोनों नित्य दम्पति फूलों की डाल हैं। [3]
श्री माधुरी दास जी कहते हैं कि श्री श्यामाश्याम से फूलों का भार भी संभाला नहीं जा रहा है, क्योंकि दोनों प्रिया प्रियतम फूल से भी अति कोमल हैं। [4]

