त्वदलोकन-कालाहि - श्री रघुनाथ दास गोस्वामी, विलाप कुसुमांजलि (9)

त्वदलोकन-कालाहि - श्री रघुनाथ दास गोस्वामी, विलाप कुसुमांजलि (9)

त्वदलोकन-कालाहि-दंशैरेव मृतं जनम्‌।
त्वत्‌ पादाब्जमिलल्लाक्षाभेषजैर्देवि जीवय॥
- श्री रघुनाथ दास गोस्वामी, विलाप कुसुमांजलि (9)

हे क्रीड़ा परायण स्वामिनी श्री राधे!, आपके दर्शन के अभाव में मैं काले सर्प के डंक से क्षण क्षण मरी जा रही हूँ। कृपया अपने श्री चरण कमल में संलग्न अलतारूप (महावर) औषधि देकर मुझे जीवन प्रदान करो।