प्यारी छवि देषौ नयन भरि आली - श्री संकेत अली, संकेतलता (71)

प्यारी छवि देषौ नयन भरि आली - श्री संकेत अली, संकेतलता (71)

(राग पीलू दादरा)
प्यारी छवि देषौ नयन भरि आली।
ललित कुंज वृषभान सुता संग, शोभित हैं बनमाली॥ [1]
कबहुंक बिहरत गल बाहीं दे, गहे सुमन तरु डाली।
अलिसंकेत निहारत शोभा, नित प्रति अदां निराली॥ [2]

- श्री संकेत अली, संकेतलता (71)

हे सखी, ऑंखें भरकर श्री प्यारी जू की अनुपम छवि को देखो।
सुन्दर कुञ्ज में वनमाली श्री कृष्ण वृषभानु सुता श्री राधा के संग सुशोभित हैं। [1]

कभी तो श्री श्यामाश्याम गलबाहीं दिए पुष्प-लताओं में विहरण करते हैं। श्री संकेत अलि जी कहते हैं कि श्री राधा कृष्ण की निराली अदाओं की शोभा को मैं नित प्रति निहारता रहता हूँ। [2]