रसिक सिरोमनी लाड़िली सो हमरे अंग संग - श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (262)

रसिक सिरोमनी लाड़िली सो हमरे अंग संग - श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (262)

रसिक सिरोमनी लाड़िली, सो हमरे अंग संग ।
कुंज महल राजैं सदा, निरखै केलि अभंग ॥   

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (262)

रसिक शिरोमणि कुंज बिहारिनी, श्री लाड़ली जू (श्री राधा) सदा हमारे अंग-संग रहती हैं, इसी कारण हम कुंज महल में विराजते हुए, उनकी अखंड केलि को सदा निहारते रहते हैं।