कदा वा राधायाः पदकमल - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (191)

कदा वा राधायाः पदकमल - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (191)

कदा वा राधायाः पदकमलमायोज्य हृदये
दयेशं निःशेषं नियतमिह जह्यामुपविधिम् ।
कदा वा गोविन्दः सकलसुखदः प्रेम करणाद
अनन्ये धन्ये वै स्वयमुपनयेत स्मरकलाम् ॥

- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (191)

मैं कब श्रीराधा के परम करुणायुक्त चरण कमलों को हृदय में धारण करके इस संसार के नियमित विधि निषेधों को पूर्ण रूप से त्याग दूंगी, और कब सर्व सुखद गोविन्द मुझे श्री राधा के प्रति अनन्यता से धन्य दासी जान, निकुंजांतर सेवा योग्य काम-कला का शिक्षण करेंगे?