अहो लड़ैती लाड़ली, अलखि लड़ी सुकुमारु - श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (35)

अहो लड़ैती लाड़ली, अलखि लड़ी सुकुमारु - श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (35)

अहो लड़ैती लाड़ली, अलखि लड़ी सुकुमारु ।
मन हरनी तरुनी तनक, दिखरावहु मुखचारु ॥

- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (35)

हे लड़ैती लाड़ली श्री राधे! हे अति सुकुमार अलख लड़ी, मनोहारनी किशोरी जू! कृपा कर मुझे अपने सुंदर मुख की थोड़ी सी झलक दिखलाइये ।