श्री जमुना-जल पान करू, वसु वृंदावन धाम ।
मुख में महाप्रसाद रखु, लै श्री वल्लभ नाम ॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (23)
मेरी यही अभिलाषा है कि मैं सदा वृंदावन का वास करूं और श्री यमुना जल का पान करता रहूं। मुख में महाप्रसाद रखूं और श्री वल्लभ नाम का उच्चारण करूं।
मुख में महाप्रसाद रखु, लै श्री वल्लभ नाम ॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (23)
मेरी यही अभिलाषा है कि मैं सदा वृंदावन का वास करूं और श्री यमुना जल का पान करता रहूं। मुख में महाप्रसाद रखूं और श्री वल्लभ नाम का उच्चारण करूं।

