मोर-चन्द्रिका स्याम-सिर, चढ़ि कत करति गुमानु ।
लखिबी पायन पे लुठति, सुनियतु राधा-मानु ॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (20)
अरी मोर-चंद्रिका! श्री कृष्ण के सिर पर चढ़कर क्यों इतरा रही है? सुना है, श्री राधा मान करके बैठी हैं । अतैव शीघ्र ही तुझे उनके पाँवों पर लोटते हुए देखूँगी ।
लखिबी पायन पे लुठति, सुनियतु राधा-मानु ॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (20)
अरी मोर-चंद्रिका! श्री कृष्ण के सिर पर चढ़कर क्यों इतरा रही है? सुना है, श्री राधा मान करके बैठी हैं । अतैव शीघ्र ही तुझे उनके पाँवों पर लोटते हुए देखूँगी ।

