(राग आसावरी)
देखौ माई सुंदरता कौ पुंज ।
अंग अंग प्रति अमृत माधुरी, देखि मदन भयो लुंज ॥ [1]
नख सिख सुभग सिंगार बन्यो है, सोभा मनि गन रूंज ।
'चतुर्भुज' प्रभु गिरिधरन लाल सिर, लाल टिपारौ गुंज ॥ [2]
- श्री चतुर्भुज दास
हे सखी, सौंदर्य की पराकाष्ठा (श्री कृष्ण) को निहारो! प्रत्येक अंग से अमित माधुरी छलक रही है जिसको निहार कर साक्षात कामदेव भी लज्जित हो रहा है । [1]
नख सिख पर्यंत सुंदर श्रृंगार सुशोभित है मानो मणि-रत्नों का समूह उमड़ पड़ा हो । श्री चतुर्भुज दास कहते हैं कि श्री कृष्ण ने सिर पर सुंदर लाल पगड़ी और गले में गुंजमाला धारण की हुई है । [2]
देखौ माई सुंदरता कौ पुंज ।
अंग अंग प्रति अमृत माधुरी, देखि मदन भयो लुंज ॥ [1]
नख सिख सुभग सिंगार बन्यो है, सोभा मनि गन रूंज ।
'चतुर्भुज' प्रभु गिरिधरन लाल सिर, लाल टिपारौ गुंज ॥ [2]
- श्री चतुर्भुज दास
हे सखी, सौंदर्य की पराकाष्ठा (श्री कृष्ण) को निहारो! प्रत्येक अंग से अमित माधुरी छलक रही है जिसको निहार कर साक्षात कामदेव भी लज्जित हो रहा है । [1]
नख सिख पर्यंत सुंदर श्रृंगार सुशोभित है मानो मणि-रत्नों का समूह उमड़ पड़ा हो । श्री चतुर्भुज दास कहते हैं कि श्री कृष्ण ने सिर पर सुंदर लाल पगड़ी और गले में गुंजमाला धारण की हुई है । [2]

