राधा ही के भजन से, पाऊँ राधा बाल ।
हँसि हँसि मो तन देखि हैं, करि हैं मोहि निहाल ॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (32)
श्री राधा का अनन्य भजन करके ही श्री राधा को प्राप्त किया जा सकता है जिसके पश्चात् वे नित्य ही हंस हंस कर निहारती हैं एवं निहाल करती रहती हैं ।
हँसि हँसि मो तन देखि हैं, करि हैं मोहि निहाल ॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (32)
श्री राधा का अनन्य भजन करके ही श्री राधा को प्राप्त किया जा सकता है जिसके पश्चात् वे नित्य ही हंस हंस कर निहारती हैं एवं निहाल करती रहती हैं ।

