आज विराजत आलीरी नवल किसोर - श्री रूप रसिक देवाचार्य, नित्य विहार पदावली (19)

आज विराजत आलीरी नवल किसोर - श्री रूप रसिक देवाचार्य, नित्य विहार पदावली (19)

(राग ललित)
आज विराजत आलीरी नवल किसोर ।
अरस परस अंसनि भुज दीनैं अति रंगभीनें भोर ॥ [1]
गौर स्यांम अभिरांम सु छवि लखि लज्जित काम करोर ।
रूपरसिक जन मन सुखदायक मिथुन मनोहर जोर ॥ [2]

- श्री रूप रसिक देवाचार्य, नित्य विहार पदावली (19)

हे सखी! आज नवल किशोर श्री श्यामा श्याम अद्भुत रूप से विराज रहे हैं। भोर में दोनों एक दूसरे को आलिंगन किए हुए, एक दूसरे की भुजाओं में भुजाएं डाले रसरंग में भींजे हुए हैं। [1]

गौर श्यामल वर्ण की इस सुंदर जोड़ी को निहार कर करोड़ों कामदेव लज्जित हो रहे हैं। श्री रूप रसिक देवाचार्य जी की कहते हैं कि समस्त रसिकों के मन को सुख प्रदान करने वाली इस दिव्य दंपति की मनोहर जोड़ी की जय हो। [2]