दिनेदिनेतिवर्द्धिष्णु-महाभक्ति-विरक्तिमान ।
कोऽपि वृन्दावने धन्यो भाति राधापदाश्रितः ॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.66)
प्रतिदिन अत्यन्त वर्द्धनशील महाभक्ति व वैराग्ययुक्त होकर, कोई एक भाग्यवान पुरुष ही अनन्य रूप से श्रीराधा-पदाश्रित होकर श्रीवृन्दावन में वास करता है ।
कोऽपि वृन्दावने धन्यो भाति राधापदाश्रितः ॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.66)
प्रतिदिन अत्यन्त वर्द्धनशील महाभक्ति व वैराग्ययुक्त होकर, कोई एक भाग्यवान पुरुष ही अनन्य रूप से श्रीराधा-पदाश्रित होकर श्रीवृन्दावन में वास करता है ।

