प्यारी तेरे बड़े बड़े नैन सलोने ।
चंचल चपल अरुन अनियारे, चितवनि में करैं टौने ॥ [1]
मान भरे उजरे अति नीकै, मनों रस रूप के दौने ।
अलबेली अलि बदन कमल पर, पीवत मधुर अली छौने ॥ [2]
- श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (168)
हे प्यारी जू (श्री राधे)! तुम्हारे बड़े-बड़े नयन अति सलोने हैं, जो चंचल, चपल, अरुण, एवं अनियारे हैं, और जिनकी थोड़ी सी चितवनी ही टोना कर देती है। [1]
वे मान से भरे हुए उज्जवल दिखते हैं और अति ही सुंदर हैं, मानो रूप रस का अनोखा मेल हों। श्री अलबेली अलि जी कहते हैं कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे आपके सुंदर मुख कमल के रस को तुम्हारे नेत्र सदा भँवर की भाँति पीते हों। [2]
चंचल चपल अरुन अनियारे, चितवनि में करैं टौने ॥ [1]
मान भरे उजरे अति नीकै, मनों रस रूप के दौने ।
अलबेली अलि बदन कमल पर, पीवत मधुर अली छौने ॥ [2]
- श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (168)
हे प्यारी जू (श्री राधे)! तुम्हारे बड़े-बड़े नयन अति सलोने हैं, जो चंचल, चपल, अरुण, एवं अनियारे हैं, और जिनकी थोड़ी सी चितवनी ही टोना कर देती है। [1]
वे मान से भरे हुए उज्जवल दिखते हैं और अति ही सुंदर हैं, मानो रूप रस का अनोखा मेल हों। श्री अलबेली अलि जी कहते हैं कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे आपके सुंदर मुख कमल के रस को तुम्हारे नेत्र सदा भँवर की भाँति पीते हों। [2]

